मन में उठती विचारों की लहरों को शब्दों में ढालने की कोशिश है ये, हमारी आपकी बातें हैं और पाठकों के दिलों को छू लेने का प्रयास भी है।

फौजी की पत्नी

फौजी की पत्नी

फौजी पति जब भी घर आते
समय यहीं पर रूक जाए
उसके मन के तार झंकृत होकर दिल से कहते
उनके प्यार में वसीभूत
नवयौवना पत्नी
किसी न किसी बहाने 
उनके आसपास चक्कर लगाती
कभी आँखों में आँख डालकर
कभी दूर से ही
घूंघट की आड़ से
प्रिय की एक झलक देखकर
खुशियों से इतराती
अपनी हर जिम्मेदारियों को
वह बखूबी निभाती
और
भारत माता की रक्षा की जिम्मेदारी
पति को सौंप
गर्व से बहादुरी के किस्से सबको सुनाती
"आप कीजिए देश की रक्षा
माता पिता की मैं रक्षक बनूंगीं
संगिनी हूँ आपकी
हर मुश्किलों का सामना डटकर करूंगी"
फौजी की नव विवाहिता पत्नी भी
प्रहरी बन जाती है 
अपने सुखों की तिलांजलि देकर
पति के साथ साथ वह भी
अपना हर धर्म निभाती है।

-सविता शुक्ला
 

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