मन में उठती विचारों की लहरों को शब्दों में ढालने की कोशिश है ये, हमारी आपकी बातें हैं और पाठकों के दिलों को छू लेने का प्रयास भी है।

बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए

पलक आज शादी की पच्चीसवीं सालगिरह पर फौजी पति का इंतजार कर रही थी। सुबह से ही वह पुरानी, सुखद यादों में खोयी हुई है। हाथ कामों मे लगे थे पर मन आज उसके वश मे नहीं था। वह बार बार पच्चीस साल पीछे जा रहा था। किसी तरह घर का जरूरी काम खत्म करके वह आंगन मे पड़े खाट पर बैठ ही जाती है। वहाँ से घर का मुख्य द्वार सामने दिखता है। पति का इंतजार करते करते वह अतीत मे खो जाती है।
उसकी अरेंज मैरिज है। शादी से पहले उन दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे को नहीं देखा था। उन दोनों ने सिर्फ एक दूसरे की फोटो  देखी थी। शादी में भी रिश्तेदारों के बीच वे सारे रस्मों को निभाते रहे, पर नव विवाहित पति पत्नी के बीच बातचीत नहीं हो पायी थी।  दो दिन ससुराल में रह कर वह मायके आ गयी थी। फिर शुभ दिन देखकर पति उसे मायके से  विदा कराने आए। पलक ने उन्हें दूर से ही देख लिया। पर वे उसे नहीं देख पाए। 
उनके घर में आते ही सब लोग उनकी सेवा सत्कार मे लग गए। नये दामाद पहली बार ससुराल आए थे। आवभगत में कोई किसी तरह की कमी नहीं रखना चाहता था। इस तरह सबसे मिलते मिलाते दो तीन घंटे बीत गए। पिताजी ने उन से कहा,"अब आप थोड़ी देर आराम कर लीजिए। सफर में थक गए होगें।" तब वे आराम करने कमरे मे गये।
वे कमरे में अकेले थे, पलक चुपके से उनके पास गयी। उस जमाने मे पत्नी भी पति से शरमाती थी। पर उनसे मिलने की भी बेकरारी थी। पर्दे के पीछे से उनको देख ही रही थी कि पति की नजर उस पर गई। उसको देखते ही गुस्से में अपनी घड़ी की तरफ इशारा करते हुए पति बोले," देखो पूरे तीन घंटे हो गए मुझे यहाँ आए हुए और तुम अभी मेरे पास आयी हो। मैं तुम से मिलने के लिए बेकरार था। हर पल मेरी आँखें तुम्हें खोज रही थी। मैं तुम से मिलने को बेताब हूँ और तुम घर मे छुपी बैठी है। अब तो मेरा मन कर रहा था कि लाज शरम छोड़कर खुद ही घर के अंदर जाऊँ और तुम्हें ढूंढ निकालूँ।" 
उनकी इस अनोखी अदा पर पलक मन ही मन फिदा हो गयी। पर संकोचवश सिर्फ इतना ही कह पाई, "घर के बड़ों के सामने आपके पास आने में मुझे लज्जा आ रही थी।" उसका मासूम सा उत्तर सुनकर पतिदेव का गुस्सा एक मिनट में ही छू मंतर हो गया। आज भी वह मुलाकात याद करके उसके  होंठों पर मुस्कुराहट आ गई और लज्जावश गाल गुलाबी हो गये।
"कहाँ खोई हो मैडम ?" पति की आवाज सुनकर वह चौंक गयी। सपनों से निकलकर वह हकीकत की दुनिया मे आ गयी। हकीकत तो सपने से भी ज्यादा सुंदर है। यह सोचकर वह बोली, "आप कब आए ? आपके इंतजार मे ही पलकें बिछाए बैठी थी।"  "हाँ, यह मुझे दिख रहा है।" पति ने मुस्कुराते हुए कहा।
"चलिए, हाथ मुँह धोकर कपड़ें बदलिए। मैं चाय बनाती हूँ।" पलक की बात पति ने मान ली। जबतक पलक चाय लेकर आयी, पति ने बच्चों के लिए लाए गिफ्ट दे दिए थे। पापा से मनचाहा गिफ्ट पाकर बच्चे बहुत खुश थे। वे अपने कमरे मे चले गए और चाय पीने के बाद पति ने सुंदर लाल साड़ी उसे देते हुए कहा,"आज तुम यही पहनोगी तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। इसमें मैं तुम्हें नयी दुल्हन की तरह देखना चाहता हूँ।"
"यह तो बहुत सुंदर साड़ी है। मै इसे अवश्य पहनूंगी।" पलक की खुशी छुपाए नहीं छुप रही थी। उसने आलमारी से सिल्क का कुरता पायजामा निकाल कर पति को दिया और बोली, "और आप भी ये पहनकर सजीला दुल्हा की तरह लगने लगेंगे।" कुरता पायजामा को हाथ मे लेकर पति ने कहा,"वाह, तुम्हारी पसंद के भी क्या कहने। बहुत बढ़िया है।"
बच्चों ने मम्मी पापा की शादी की पच्चीसवीं  वर्षगांठ पर सरप्राइज पार्टी रखा था। कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों को भी बुलाया, केक काटा गया। सबके खाने पीने का इंतजाम भी इतनी अच्छी तरह किया कि सभी अचंभित थे। पति ने भावुक होते हुए कहा,"मैं तो भारत माँ की सेवा मे सरहद पर रहता हूँ। बहुत कम समय के लिए छुट्टियों मे घर आ पाता हूँ। परिवार को भी बहुत कम समय दे पाता हूँ। पर पलक ने मेरी जीवनसंगिनी बनकर मेरी अनुपस्थिति मे भी सभी फर्ज बहुत अच्छे से निभाया है।"
पलक ने प्यार से कहा," ये सब आपके प्यार और विश्वास की वजह से मैं कर पायी। आप पास न होकर भी हर कदम पर मेरे साथ होते हैं। आप ही मेरे संबल हो।" पति भी आज सब कुछ कह ही देना चाहते थे,जो वर्षों से सोचते आए थे। उन्होंने कहा, " तुम भी एक वीरांगना से कम नहीं, जो कठिन से कठिन परिस्थिति मे भी हिम्मत नहीं हारी और मुश्किलों का सामना करके भी रुकी नहीं। बड़ों की सेवा की और बच्चों को भी अच्छी परवरिश दी। जिससे आज हमें यह खुशियाँ मिलीं।"
पलक को पच्चीस सालों की तपस्या का फल मिल रहा था। अपनों का ढ़ेर सारा प्यार और सम्मान पाकर फूली नहीं समा रही थी। एक नयी प्रेमिका की तरह वह गुनगुनाने लगी 
"आजकल पाँव जमीं पर नहीं पड़ते मेरे बोलो देखा है कभी तुमने मुझे उड़ते हुए"
एक सुखद दाम्पत्य के लिए असीम प्यार और अटूट विश्वास बहुत जरूरी है।
-सविता शुक्ला 

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