हम रोज जिंदगी का पाठ पढ़ते हैं. कभी याद रखते हैं. कभी उसे भूल जाते हैं.
इसी तरह हमारी जिंदगी चलती रहती है. हम रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रहते हैं. पर सारे पाठ अनुभवों के रूप में हमारी अमानत बनकर रहते हैं. ये अमानत हम दूसरों पर खर्च करते हैं और दूसरों की जिंदगी आसान कर देते हैं.
अक्सर आपने बुजुर्गों को ये कहते सुना होगा कि मैंने अपने बाल धूप में सफेद नहीं किए हैं. मतलब उनके पास अनुभवों का खजाना है. जिसमें उनके दुख -सुख भरे दिनों की कहानियां हैं. इन कहानियों ने उन्हें जीना सिखाया है. कभी रोते हुए हँसना सिखाया है तो कभी कठिन दौर में धैर्यशील रहना सिखाया है.
है न ये महत्वपूर्ण बात. तब क्यों न जिंदगी को आसान बनाने के लिए उन बुजुर्गों के अनुभवों का सहारा लिया जाय.
हम भी अपने अनुभवों से दूसरों की परेशानियों को कम कर सकते हैं. हाँ, ये भी जरूरी है कि अगर कोई सलाह माँगे तभी मदद करो अन्यथा लोग अनादर भी कर सकते हैं.
जिंदगी रोज जो पाठ पढ़ाती है, पढ़ते जाओ,आगे बढ़ते जाओ. दुर्गम रास्तों को भी मनोरंजक बनाते जाओ.
-सविता शुक्ला
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