मन में उठती विचारों की लहरों को शब्दों में ढालने की कोशिश है ये, हमारी आपकी बातें हैं और पाठकों के दिलों को छू लेने का प्रयास भी है।

और वह आजाद हो गई

और वह आजाद हो गई

किट्टी पार्टी में सब सहेलियाँ मिलकर मीनल की खिंचाई कर रही थीं। रीटा ने हँसते हुए कहा, "सच मीनल, थोड़ी देर के लिए आईने में स्वयं को निहार कर रानी- महारानी होने का अहसास होता है तो इसमें क्या बुराई है।" मयूरी भी उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए मजाक करने लगी, "मैं आँखें बंद किए बिना ही सपने देखने लगी। महलों में महारानी बनकर दासियों से घिरी हुई घूम रही हूँ और सब लोग मुझे झुककर प्रणाम कर रहे हैं।"
मीनल ने कहा, "देखो, तुम लोग मेरी बातों का कितना भी मजाक बना लो। पर यह सच है कि जब भी मैं किसी ऐतिहासिक संग्रहालय में रखी रानी के आईने में देखती हूँ तो थोड़ी देर के लिए स्वयं को रानी से कम नहीं समझती हूँ। मुझे ये अच्छा लगता है।"
शमिता ने उसकी बात सुनकर कहा, "सुन, कहीं ऐसा न हो कि उस पुराने आईने में कभी तुम्हें कोई भूत दिख जाए। ऐसा कहा जाता है कि भूत आईने में दिख जाते हैं।" उसकी बातें सुन सब जोर से हँस पड़ी।
किट्टी पार्टी ऐसे ही हल्के फुल्के माहौल में खत्म हो गई।

एक बार फिर मीनल पति और बच्चों के साथ नये ऐतिहासिक स्थल पर घूमने गई। सब लोग पुराने जमाने के किले और महलों के बचे खुचे अवशेष देख रहे थे। उसके बाद सब लोग एक विशाल ऐतिहासिक संग्रहालय भी घूमने गये। घूमते घूमते सब लोग आगे निकल गए और वह फिर एक खूबसूरत आईने के सामने खड़ी थी। वहाँ पर उसके अलावा और कोई नहीं था। वह थोड़ी देर के लिए वहीं ठिठक गई।
उसने सचमुच आईने में एक चेहरा देखा जो उससे कहने लगा, "तुम आ गई। तुम्हें खुश देखकर मुझे शांति मिली। अब मैं मुक्त हो जाऊँगी।" वह कुछ सोच पाती तब तक उसके पति और बच्चे उसे खोजते हुए वहाँ आ गये । वह अकेली खड़ी डर कर थर थर काँप रही थी।
"तुम इतना डर क्यों रही हो और  यहाँ इतनी देर से आईने को ही क्यों निहार रही हो ? चलो यहाँ से " पति ने उससे कहा तो वह डरती हुई बोली, "चलो जल्दी यहाँ से।"
गेस्टहाउस लौटकर सब लोगों ने खाना खाया और थके होने के कारण जल्दी ही सोने चले गए। बिस्तर पर जाते ही सब सो गए।
सपने में मीनल ने देखा कि आईने वाली वही सुंदर लड़की उसके पास आयी और उसे बताने लगी, "मैं  राजा की लाडली बेटी रत्ना थी और तुम राजवैद्य की प्यारी बेटी मृणालिनी थी। हम दोनों में खूब अच्छी दोस्ती थी। हम ज्यादातर साथ में ही रहते थे। तुम्हारा एक अनोखा शौक था। तुम जब भी मेरे कमरे में आती मेरे आईने के सामने खड़ी होकर शर्माते हुए मुस्काती थी। उस समय तुम्हारा रुप और भी निखर जाता। तब मैं तुम्हें चिढ़ाती थी कि तुम्हारी सुन्दरता पर तुम्हारा पति तो मर मिटेगा। तुम्हें पलकों पर बैठा कर रखेगा। मेरी बात सुन तुम्हारा चेहरा शर्म से लाल हो जाता था।
पड़ोसी राजा का बेटा वीर सिंह आर्थिक संधि के लिए हमारे महल में आया था और उसने छल से अपने सैनिकों की सहायता से हमारे महल पर कब्जा कर लिया। मेरे पिता को बंदी बना दिया और हम दोनों पर भी गंदी नजर डाला। तलवार की नोक पर वह मेरा शीलहरण करना चाहता था। पर तुमने जान की बाजी लगाकर मुझे बचाया। बाद में उसके सैनिकों ने तुम्हें तलवार से काट दिया और मुझे घसीटते हुए ले जाने लगे। पर जख्मी होने के कारण मै वहीं निष्प्राण हो गई। उस आईने से मुझे बहुत लगाव था। इसलिए मेरी आत्मा वहीं अटक गई।
मेरे कमरे को वीर सिंह ने अपना शयनकक्ष बना लिया। उसकी शादी के बाद नयी नवेली पत्नी ने जैसै ही उस आईने में स्वयं को देखा तो मेरा अक्स उसे दिखा। वह पीछे मुढ़कर देखी  तो वहाँ कोई नहीं था। वह घबड़ा गई। उसने पति से ये बात बतायी। पर वीर सिंह ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उसकी पत्नी बीमार हो गई। वीर सिंह को पत्नी सुख नहीं मिला। एक दिन वह मर गई। तब उसे पत्नी की कही बात याद आयी। उसने आईने में गौर से देखा तो मेरा अक्स धुंधला सा नजर आया। वह भी डर गया।
उसने उस आईने को महल से दूर एक मकान में रखवा दिया। वर्षों वह वहीं पड़ा रहा। फिर एक दिन संग्रहालय में आईने को रख दिया गया। मैं तुम्हारी आस में इस आईने में कैद थी। मेरी जान बचाते हुए तुम्हारी जान गई थी तो मैं स्वयं को तुम्हारे मृत्यु का कारण समझती थी। आज तुम्हें सुखी सम्पन्न देख मेरी आत्मा संतुष्ट हो गयी। वीर सिंह की वंशवृद्धि ही नहीं हुई। बीमारी से तड़प तड़प कर वह मरा। अब मैं भी आजाद हो गई।"
मीनल घबड़ायी सी उठ कर बैठ गई। उसके पति ने कमरे में लाइट जलाकर देखा तो मीनल पसीने से तरबतर थी। उसको पानी पिला कर पूछा, "क्या हुआ ?" वह कुछ कहने की स्थिति में नहीं थी। इसलिए उसको सो जाने को कह खुद तब तक नहीं सोया जब तक वह सो नहीं गयी।
सुबह मीनल ने कहा, "मुझे फिर से वो आईना देखना है। प्लीज चलो न।" पति ने पूछा, "कल उस आईने के सामने डर कर थर थर काँप रही थी। रात में भी नींद से घबड़ाकर जाग गयी थी। अब फिर से उस आईने को देखने के लिए इतनी उत्सुक  क्यों हो रही हो ? ये सब क्या हो रहा है ? प्लीज , बताओ।"
मीनल से सब बात उसे बताया तो वह भौचक्क था। फिर भी पत्नी के बहुत जिद करने पर वह उसके साथ आईने को दिखाने ले गया। इस बार आईने में मीनल को कोई नहीं दिखाई दी तो उसके दिल को सुकून मिला। फिर कभी मीनल को ऐसा सपना भी नहीं आया। पर उसकी  आईने में खुद को निहार कर खुश होने की आदत नहीं छूटी।
सविता शुक्ला



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