मन में उठती विचारों की लहरों को शब्दों में ढालने की कोशिश है ये, हमारी आपकी बातें हैं और पाठकों के दिलों को छू लेने का प्रयास भी है।

रक्षाबंधन -स्नेह का बंधन

रक्षाबंधन -स्नेह का बंधन

रक्षाबंधन का पर्व आते ही
याद आते हैं वो सारे पल एक साथ
जब हम राखी बड़े चाव से खरीदते थे
भाई को राखी बांधते और मिठाईयां खिलाते थे
बचपन में राखी का महत्व समझ में नहीं आता था
नये कपड़े, मिठाईयां और गिफ्ट से ही मन खुश हो जाता था
शादी के बाद जब भाई से दूर हुई
रक्षाबंधन के दिन भाई को देखने के लिए भी तरस गई
भाई की सूनी कलाई याद आते ही आँखें भर जातीं थी
पति से कह स्पीड पोस्ट से भाई को राखी भेजवाती थी
समय पर राखी न मिलने पर भाई नाराज हो जाता था
आँखों में आँसू लिए फोन पर नाराजगी जताता था
तब बड़े होने पर समझ में ये आया
राखी की पतली सी डोर में ढ़ेर सारा स्नेह है समाया
राखी भाई बहन के प्यार को एक डोर से बाँधकर रखती है
आशीर्वादों से उनके रिश्तों को सींचती है
राखी के धागों में बहनों का आशीर्वाद बसा होता है
बहन को हर कदम पर साथ देने का वचन भाई भी याद रखता है
रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है
पकवान की मीठी मीठी खुशबू सा भाई बहन के रिश्तों को महकाता है।
-सविता शुक्ला

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