रिया पढ़ने लिखने में बहुत होशियार थी। घर के कामों में माँ का हाथ भी बँटाती थी और बड़े भाई के साथ बाजार से सामान की अच्छी तरह खरीदारी करना भी सीख ली थी। वह एक अच्छी बेटी की तरह सबका बात मानती थी।
पर उसे एक बात से सख्त नफरत थी, वो थी सास, बहु और साजिश। यहाँ किसी सिरीयल की बात नहीं हो रही है।
ये हर घर की अटपटी व चटपटी कहानी होती है। जिससे रिया को बहुत चिढ़ थी। वह रिश्तों में सिर्फ प्यार देखना चाहती थी।
जब सब लोग प्यार से इकट्ठा होकर ढ़ेर सारी बातें करते थे तो रिया का मन खुशियों से झूम उठता था। वह कभी किसी को उदास नहीं देख सकती थी। इसलिए हल्के फुल्के बातों से लोगों को खुश करने की कोशिश करती रहती। उसकी इन आदतों को देखते हुए लोग कहते, "कितना बचपना है रिया में। पता नहीं ससुराल जाकर यह लड़की सब कुछ कैसे संभालेगी ?" वह झट से उत्तर देती, "प्यार से।" वह सोचती प्यार से पूरी दुनिया जीती जा सकती है।
शादी के बाद वह ससुराल में प्यार से दिलों को जीतने में लगी थी और उसके पीछे साजिश का साया लगातार चल रहा था। संयुक्त परिवार में न सासूओं की कमी थी न बहुओं की। वह मायके की तरह सादा खाना बनाती तो कोई न कोई रोज उसके बनाए खाने में कमी निकाल ही देता। वह एक कमी को ठीक करती तो दूसरी कमियाँ खोज ली जातीं। पर वह हार नहीं मानती और वहाँ के लोगों के अनुसार हर काम सीखने की कोशिश करती रहती। इससे उसे भी खुशी मिलती।
उसकी ननद मायके आयी थी। फोन पर सिर्फ औपचारिक बातें ही होतीं। शादी में भी उनसे ज्यादा बात नहीं हो पायी थी। इसलिए शादी के बाद वह पहली बार ननद के साथ आराम से बैठकर बात करेगी, यह सोचकर उनके कमरे की ओर गई तो उसने जेठानी की बेटी को बुआ से शिकायत करते हुए सुना। वह कह रही थी, "छोटी चाची को तो कुछ भी नहीं आता है। एक दिन भी अच्छा खाना अभी तक नहीं बनायी हैं। घर में सब लोग उन्हें खाना बनाना सीखने को कहते रहते हैं। पर वो हैं कि एक शब्द भी नहीं कहतीं। सोचिए बड़ों का अपमान करती रहतीं हैं।" रिया छोटी सी बच्ची की इतनी बड़ी बातें सुन कर अचंभित थी। उस समय उसके दिमाग में ये भी नहीं आया कि ऐसे तोड़ मरोड़ कर बात का बतंगड़ बनाने वाली को तगड़ा जबाब दे ताकि आगे से वह ऐसा कभी नहीं कर सके। वह अत्यधिक दुखी होकर वहाँ से लौट आयी।
वह पति से सारी बात बताई तो उन्होंने कहा, "तुमने उससे कुछ न कहकर समझदारी वाला काम किया है। मैं घर मे था नहीं। तब सब लोग उसे सही और तुम्हें गलत समझ कर खूब खरी खोटी सुनाते। क्योंकि वह सबके साथ मीठी मीठी बातें कर लाडली बनी फिरती है और तुम इस घर में नयी हो। तुम्हारा स्वभाव अभी अच्छी तरह किसी को नहीं मालूम है। पर हाँ, अब उससे सचेत रहना। मैं अवसर देखकर दीदी से इस मामले में बात करूँगा।" रिया ने सिर हिलाकर "हाँ" कह दिया। उसने पति से पूछा, "जब इतने कम समय में आपने मुझे पहचान लिया तो घर के अन्य सदस्य क्यों नहीं पहचान पाए ? मैं तो प्यार से सब का दिल जीतना चाहती हूँ और कुछ नहीं।" उन्होंने कहा, "इतने बड़े घर में सब तरह के लोग हैं। सब की मानसिकता भी अलग है तो तुम सबके साथ एक जैसा व्यवहार करके खुश कैसे कर सकती हो ? इसलिए ज्यादा मत सोचो और सो जाओ।" रिया ने पति से प्यार से कहा,"अगर आप जैसा समझदार जीवनसाथी मुझे नहीं मिलता तो मेरा क्या होता?" " वही होता जो मंजुरेखुदा होता। अब सो भी जाओ।" कह कर पति ने सोने का ईशारा किया।
वह चुपचाप लेटी रही। नींद नहीं आ रही थी।आज की छोटी सी घटना से उसे बहुत दुख हुआ था। पर पति का साथ पाकर वह निश्चिंत भी हुई थी। फिर भी वह वही सब बातें सोच रही थी। बड़ों की बातों का जबाब देकर वह उन्हें अपमानित नहीं करना चाहती थी। इसलिए चुप रही तो इसका उस बच्ची ने गलत मतलब बना दिया कि जबाब न देकर वह उनका अपमान करती है। वाह रे ससुराल, यहाँ आकर क्या क्या सीखना अभी बाकी है। उसे सीरियल वाली कहानियां याद आने लगीं जो उसे बिलकुल पसंद नहीं थी। पर अब ऐसा लगता है रोज ऐसी बातों को झेलना पड़ेगा। फिर एक दिन वह इसकी आदी हो जाएगी। वह मुस्कुराते हुए सोची कि क्या प्यार से रिश्तों को जोड़ना इतना मुश्किल है?
इस तरह नये माहौल में एक लड़की ढलने लगती है और वह कब बदलती चली जाती है इसका उसे भी पता नहीं चलता। वह प्यार से जीना चाहती है पर प्यार के साथ समझदारी भी बहुत जरूरी होता है रिश्तों से जुड़े रहने के लिए। तभी तो वह साजिश को नाकाम कर रिश्तों को मजबूत बना पाएगी।
सविता शुक्ला
Very nice.
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