मन में उठती विचारों की लहरों को शब्दों में ढालने की कोशिश है ये, हमारी आपकी बातें हैं और पाठकों के दिलों को छू लेने का प्रयास भी है।

विचलित मन

विचलित मन

विचलित मन रच नहीं पाता
नव सृजन
वह भटकाता है विचारों को
चकरघिन्नी की तरह
और छोड़ देता है मनुष्य को
दुख की राहों पर
चलने के लिए,
इसलिए जरूरी है
विचलित मन को
काबू में रखना।
सविता शुक्ला

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