सावन आया, सावन आया, सावन आया रे
बारिश की बूँदों से प्रेम रस बरसाया रे
पिया मिलन की आस दिल में जगाया है
नारी के कोमल मन में खुशियों के फूल खिलाया है
सावन आया, सावन आया, सावन आया रे
बारिश की बूँदों से प्रेम रस बरसाया रे
सखियों ने पूजन कर शिव भक्ति के गीत गाया है
हरी हरी मेंहदी हाथों में रचाया है
सावन आया, सावन आया, सावन आया रे
बारिश की बूँदों से प्रेम रस बरसाया रे
सूखी पड़ी धरती भी हरी भरी हो गई है
सोलह श्रृंगार कर प्रिया अपने प्रिय को मिलने लगी है
सावन आया, सावन आया, सावन आया रे
बारिश की बूँदों से प्रेम रस बरसाया रे
मन की बगिया में उमंगों के झूले लग रहे हैं
हरी चुड़ियों की खनक से प्रिय के दिल भी जुड़ने लगे हैं।
सावन आया, सावन आया, सावन आया रे
बारिश की बूँदों से प्रेम रस बरसाया रे
-सविता शुक्ला
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